अभिप्रेरणा का विचारधारा पर प्रभाव – दीपेश पालीवाल (Google)

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अभिप्रेरणा का विचारधारा पर प्रभाव – दीपेश पालीवाल (Google)

अभिप्रेरणा का विचारधारा पर प्रभाव…

DIPESH

आधुनिक जीवन में मानव समाज में किसी भी व्यक्ति के सर्वांगीण विकास हेतु सकारात्मकता की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।

सकारात्मक सोच से व्यक्ति दुनिया का कठिन से कठिन कार्य बड़ी ही आसानी से कर सकता है। और अपने जीवन के प्रत्येक लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है।

सकारात्मक सोच व्यक्ति को सदैव कार्य करने हेतु अभिप्रेरित करती है। और व्यक्ति को कभी हतोत्साहित नही होने देती।

नकारात्मकता व्यक्ति की सोच का दूसरा पहलू होती है जो सकारात्मकता के बिल्कुल विपरीत कार्य करती है यह दौनो ही शक्तियां व्यक्ति के भीतर विधमान होती है।

तो व्यक्ति में नकारात्मकता के बढ़ने के क्या कारण है ?

आखिर क्यों व्यक्ति सकारात्मकता की तुलना में नकारात्मकता की ओर अधिक आकर्षित होता है ?

ऐसा क्यों होता है …?

इसका मुख्य कारण है असफलता ओर बाह्य अभिप्रेरणा यह दौनो ऐसे कारण है जो सामान्य व्यक्ति के मन मस्तिष्क नकारात्मकता को जन्म देते है और व्यक्ति के चहुँमुखी विकास में बाधा बनते है।

साथ ही व्यक्ति की संकुचित सोच भी नकारात्मकता को जन्म देती है , एक कहावत है छोटी सोच और पैर में मोच व्यक्ति को आगे नही बढ़ने देती।

अतः व्यक्ति की संकुचित धारणा ही व्यक्ति को बढ़ने नही देती।इसलिए आवश्यक है कि सभी व्यक्तियों में सकारात्मक सोच एवं सकारात्मक विचारों का निर्माण किया जाए। जिससे व्यक्ति का सर्वांगीण विकास किया जा सके।इस हेतु व्यक्ति को सही दिशा में अभिप्रेरीत होकर आगे बढ़ना आवश्यक है यह अभिप्रेरणा उसे स्वयं से या बाह्य स्रोतों से लेनी चाहिए और साथ ही व्यक्ति का आशावादी होना भी आवश्यक।

तब ही व्यक्ति अपनी सोच को नियंत्रित कर सही दिशा में प्रयोग कर सफलता प्राप्त कर सकेगा।
सफलता हेतु किसी किस्मत ,चेक या किसी प्रकार जेक की आवश्यकता नही है आवश्यकता है तो बस सकारात्मक सोच की , तो विषम परिस्थियों में भी सदैव सकारात्मक रहिए।

दीपेश पालीवाल
Google
9950716258

 

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