असफ़लता का भय क्यो…? – दीपेश पालीवाल

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असफ़लता का भय क्यो…? 
असफ़लता का भय क्यो…? 

असफ़लता का भय क्यो…?

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दीपेश पालीवाल Google 9950716258

जिस प्रकार किसी सिक्के के दो पहलू होते है चित ओर पट उसी प्रकार जीवन सिक्के के दो महत्वपूर्ण पहलू है सफलता और असफ़लता ।

जिस प्रकार हम खेल – खेलने के दौरान सिक्का उछालते समय यह नही सोचते कि हमे चित प्राप्त होगा या पट तो हम अपने जीवन मे किसी कार्य को करते समय सफलता या असफलता का तनाव क्यो ले, हम क्यो असफलता के दबाव में जिए , हम अपने कर्म पर विश्वास रखें ।

हमारे लाख प्रयास करने कर बाद भी यदि हमे अपने कर्म के अनुसार फल की प्रप्ति न हो तब भी तनाव या दबाव की आवश्यकता नही है।

समस्त भूमण्डल पर ऐसे कई उदाहरण है जिन्हे शुरुआत में अपने कर्म के अनुसार फल नही मिला किंतु आज वे एक सफल व्यक्तित्व के साथ साथ युवाओ के लिए एक आदर्श है। आज वे लोग दुनिया में अपनी विशेष पहचान रखते है।

तो क्या करें ..?

असफलता के बाद शांति से बैठ जाए, या तुरन्त उठ पुनः अपने कर्म पर लग समग्र संसार के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करें।

कई राज्यो में बोर्ड परीक्षा के परिणाम आ चुके है तो कई राज्यो में आने बाकी है , कई छात्र बहुत अच्छे अंको के साथ जिला मेरिट या राज्य मेरिट में उच्च स्थानों पर होंगे उन्हें बधाई।

लेकिन कई साथी ऐसे भी होंगे जिन्हें अपनी ईच्छानुसार परिणाम नही प्राप्त हुआ । तो ऐसे साथियों को दबाव या तनाव में आने की बिल्कुल भी आवश्यकता नही है।जीवन में हर बार वो नही होता जो हम चाहते है लेकिन जो होता वो बेशक अच्छा न हो किंतु अच्छे के लिए ही होता है।

तो तुरंत उठे और पुनः अपने कर्म पर लग जाए अपने मित्र परिवार ओर भाई बहन के लिए एक आदर्श के रूप में प्रस्तुत करें। सफलता या सफलता जीवन का नाम नही है यह जीवन का एक छोटा सा हिस्सा है । सफलता पर अहंकार न पालें ओर असफलता पर तनाव न पालें।

ओर किसी भी अंक तालिका द्वारा आपकी योग्यता को नही दर्शाया जा सकता। आप मे सफ़लता की अपार सम्भावनाएं है बस शर्त है आप असफलता के भय और तनाव को जीवन पर प्रभावी न होने देवे।

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दीपेश पालीवाल
उदयपुर राज.

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